Vivah Muhurat 2022: नवंबर से शुरू होगा शादियों का सीजन, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग 2022 विवाह मुहूर्त , 2023 में शादी के शुभ मुहूर्त कौन कौन से हैं? ,Vivah Muhurta In 2022-2023 

Vivah Muhurta In 2022 : हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए शुभ समय देखना आवश्यक होता है। जुलाई माह में देवशयनी एकादशी से श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। उनके योग निद्रा के साथ सभी शुभ और मांगलिक कार्य चार माह के लिए बंद हो जाते हैं। उसके बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त होता है और इसी दिन से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस बार देवशयनी एकादशी 4 नवंबर, शुक्रवार को है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन इस दिन से भगवान विष्णु अपना कार्यभार संभालते हैं और इसके अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है। इस बार तुलसी विवाह भी 5 नवंबर को है। आइए जानते हैं इस बार के विवाह के शुभ मुहूर्त के बारे में। 

 
 


देव उठनी एकादशी पर नहीं है कोई भी मुहूर्त 
देव उठनी एकादशी 4 नवंबर को है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दौरान सूर्य की स्थिति विवाह के लिए उचित नहीं है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो सूर्य इस दौरान वृश्चिक राशि में सूर्य न होने के कारण देव उठने के बाद भी विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं है। Vivah Muhurta 2022-2023

 
  • नंवबर 2022 में विवाह के मुहूर्त
  • 21 नवंबर 2022
  • 24 नवंबर 2022
  • 25 नवंबर 2022
  • 27 नवंबर 2022

 

  • दिसंबर 2022 में विवाह के मुहूर्त 
  • 2 दिसंबर 2022
  • 7 दिसंबर 2022
  • 8 दिसंबर 2022
  • 9 दिसंबर 2022
  • 14 दिसंबर 2022 


 विवाह मुहूर्त 2022 नवंबर

देवोत्थान एकादशी पर क्यों करते हैं शुभ कार्य? 
कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। कहते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह शयन के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर श्री हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक (shubh vivah muhurat 2022) कार्य शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। विवाह मुहूर्त 2022 December , विवाह मुहूर्त 2022 December

Vivah Muhurta 2022-2023

देवउठनी एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं. इस दिन माता तुलसी और भगवान शालीग्राम के विवाह की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार कोई भी मांगलिक देवी-देवताओं की पूजा के बिना संभव नहीं. चातुर्मास में जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर निद्रा में होते हैं, धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में नकारात्मक शक्तियों का तेज बढ़ जाता है जिनका मांगलिक कार्य पर भी असर पड़ता है इसलिए चार माह कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. कहते देवउठनी एकादशी से सभी कुलाधिदेव और नवग्रह सक्रिय मुद्रा में होते हैं तब ही से शादियों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है.(shubh vivah muhurat 2022)

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